पातालपानी–कालाकुंड का घाट रेल के लिए ढलान की चुनौती है। पश्चिम रेलवे की संचालन पुस्तिका पातालपानी से कालाकुंड की ओर 6.03 किलोमीटर हिस्से की नियंत्रक ढलान 1:40 बताती है। ऐसी ढलान पर हर 40 मीटर क्षैतिज दूरी में ऊंचाई एक मीटर बदलती है। यह पूरे मार्ग पर एक-सी ढलान का माप नहीं, संचालन तय करने वाला मान है।
पुस्तिका के मीटर-गेज घाट नियमों में योग्य कर्मचारियों की सूची रखने का निर्देश है। संबंधित कर्मचारियों को घाट नियमों की प्रति साथ रखनी थी। इस खंड में केवल सौ फीसदी प्रभावी स्वचालित निर्वात ब्रेक वाली ट्रेन की अनुमति बताई गई है। तीखे मोड़, कटिंग और सुरंगों वाले रास्ते की बनावट इस अलग व्यवस्था का आधार है।
रतलाम मंडल के इतिहास के अनुसार महाराजा होलकर ने 1870 में इंदौर को मुख्य रेलमार्ग से जोड़ने के लिए एक करोड़ रुपये का ऋण प्रस्तावित किया। चुना रास्ता खंडवा, सनावद, नर्मदा और चोरल घाटी से विंध्य की ढलानों पर चढ़ता था। व्यापक होलकर रेलवे निर्माण में चार सुरंगें, गहरी कटिंग, रोक-दीवारें और ऊंचे पुल बने।
रेल मंत्रालय की 2023–24 वर्ष-पुस्तक में पातालपानी–कालाकुंड विरासत ट्रेन के डिब्बों का सौंदर्यीकरण दर्ज है। तांत्या मामा मंदिर और पुल संख्या 847 के ठहरावों पर प्लेटफॉर्म व पर्यटक सुविधाएं जोड़ी गईं; पातालपानी झरने का दृश्य देखने की जगह भी शामिल थी। रेल की इस विरासत में डिब्बों के साथ कठिन भूभाग में रास्ता बनाने और गाड़ी चलाने का हुनर जुड़ा है।
मुख्य बातें
- पुस्तिका में 6.03 किलोमीटर घाट खंड की नियंत्रक ढलान 1:40 दर्ज है।
- मीटर-गेज संचालन के लिए पूरी तरह प्रभावी स्वचालित निर्वात ब्रेक का नियम है।
- होलकर रेलवे के निर्माण में सुरंगें, कटिंग और ऊंचे पुल शामिल थे।
स्रोत और संदर्भ
- पश्चिम रेलवे · Western Railway Operating Manual — Ghat Sections ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- पश्चिम रेलवे, रतलाम मंडल · History of Ratlam Division ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- रेल मंत्रालय · Indian Railways Year Book 2023–24 ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।



