डिंडौरी के घुघवा माल और उमरिया तथा जबलपुर के करौंदी से मिले ताड़ के पत्तों ने पुराने जंगल की तस्वीर बदली। दस पत्तों के अध्ययन में सात जीवाश्म प्रजातियां पहचानी गईं। इनमें दो नई थीं, जिनके नाम घुघवा और उमरिया पर रखे गए।

पंखे जैसे पत्ते और उनकी मजबूत मध्य-शिरा पहचान का आधार बने। ये लावा प्रवाहों के बीच बनी तलछटी परतों से मिले थे। 2022 में प्रकाशित अध्ययन ने इन परतों को लगभग 6.6–6.4 करोड़ वर्ष पुराने दौर में रखा।

आधुनिक रिश्तेदारों और जीवाश्म पत्तों की तुलना उस समय गरम, नम उष्णकटिबंधीय वातावरण का संकेत देती है। भारतीय भूखंड के एशिया से जुड़ने से पहले मध्य भारत में ताड़ों की यह विविधता मौजूद थी।

जीवाश्मों का संरक्षण भी इस काम का हिस्सा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान के 2022–23 मूल्यांकन में घुघवा पार्क के लिए अद्यतन वैज्ञानिक प्रबंधन योजना और बीरबल साहनी संस्थान तथा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण से सहयोग फिर शुरू करने की सिफारिश की गई। इससे संग्रह और उसके अध्ययन को साथ रखने की दिशा मिलती है।

मुख्य बातें

  • दस पत्तों में सात जीवाश्म प्रजातियां पहचानी गईं।
  • दो प्रजातियों को पहली बार नाम दिया गया।
  • पत्तों से पुराने मौसम का अनुमान निकाला गया।

स्रोत और संदर्भ

  1. Plant Diversity · Coryphoid palms from the K-Pg boundary of central India and their biogeographical implications ↗13 जनवरी 2022
  2. Wildlife Institute of India · Management Effectiveness Evaluation Report — Fossil National Park, Madhya Pradesh (2022–23) ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  3. भारत की जनगणना · District Census Handbook, Dindori — Ghughua Fossil National Park ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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