राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत समय पर स्वास्थ्य परीक्षण, बीमारी की पहचान और उचित रेफरल से नटेरन विकासखंड के ग्राम गोलना निवासी 11 माह के मास्टर शिवांश शिवराज राजपूत के जीवन में नई रोशनी आई है। जन्मजात मोतियाबिंद के कारण शिवांश की आंखों के सामने धुंधला संसार था, लेकिन RBSK की टीम की सजगता और परिवार के सहयोग से उसका सफल उपचार संभव हो सका। आंगनवाड़ी केंद्र पर हुई समस्या की पहचान शिवांश जब छोटा था, उस समय उसकी आंखों में जन्मजात मोतियाबिंद के कारण देखने की समस्या थी। परिवार के लिए यह चिंता का विषय था कि उनका नन्हा बच्चा इस समस्या से कैसे उबर पाएगा और सामान्य रूप से दुनिया को देख सकेगा। इसी दौरान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की टीम द्वारा आंगनवाड़ी केंद्र पर बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान शिवांश की आंखों में समस्या की पहचान की गई। टीम ने तत्काल बच्चे को आगे की जांच एवं उपचार के लिए DEIC सेंटर रेफर किया। विशेषज्ञ चिकित्सकों से मिला उचित मार्गदर्शन DEIC सेंटर पर शिवांश की प्राथमिक जांच की गई। जांच के उपरांत चिकित्सकों द्वारा उसे उच्च स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञ परामर्श एवं सर्जरी के लिए रेफर किया गया। RBSK टीम ने परिवार को बच्चे के उपचार की आवश्यकता, उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं तथा उपचार की प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन दिया। परिवार ने भी हिम्मत दिखाई और शिवांश के बेहतर भविष्य के लिए उसे सदन हॉस्पिटल, भोपाल ले गए। यहां आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत शिवांश की आंखों की सर्जरी निःशुल्क एवं सफलतापूर्वक की गई।

सफल उपचार से लौटी आंखों की रोशनी सर्जरी के बाद शिवांश के जीवन में उम्मीद की एक नई किरण दिखाई दी। जिस बच्चे की आंखों के सामने जन्म से ही धुंधला संसार था, वह अब दुनिया को अधिक स्पष्ट रूप से देखने की राह पर है। उपचार के बाद शिवांश के चेहरे पर आई मुस्कान उसके परिवार के लिए राहत और खुशी का कारण बनी। समय पर बीमारी की पहचान, सही समय पर रेफरल, परिवार के विश्वास और शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी समन्वय की प्रेरणादायक मिसाल है। RBSK की पहल ने बदली जिंदगी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों पर किए जा रहे नियमित स्वास्थ्य परीक्षण बच्चों में जन्मजात एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। शिवांश की कहानी भी इस बात का प्रमाण है कि यदि बीमारी की पहचान समय पर हो जाए और उचित उपचार के लिए सही स्थान पर रेफर किया जाए, तो बच्चों को बेहतर और स्वस्थ भविष्य दिया जा सकता है। आज शिवांश स्वस्थ भविष्य की ओर बढ़ रहा है और उसके परिवार के चेहरे पर चिंता की जगह सुकून और खुशी की मुस्कान है।